Book review

आदरणीय राम एच. सिंघल जी

फोटोग्राफी के प्रति आपके समर्पण भाव ने Own zerO को तैयार किया। इसमें समाहित 125 तस्वीरों को मैंने गौर से देखा…जितनी बार भी देखा… उतनी बार फिर से देखने की ख्वाहिश मन में उठती रही। यही कारण रहा कि विश्व फोटोग्राफी दिवस पर मुझे मिली इस किताब को मैं अब तक सैंकड़ों बार देख चुका हूं, वरना तो अमूमन इससे पहले कई सार्वजनिक कार्यक्रम के फोटो मैंने देखे हैं जिन्हें देखने में मुझे कभी समय नहीं लगा।

ऐसा पहली बार है आपकी फोटोग्राफी को देखने के बाद ये पता चला कि एक तस्वीर को हजारों शब्दों के जरिये भी बखान नहीं किया जा सकता…, जितनी बार देखोगे वह उतनी ही बार  आपको  नया दृष्टिकोण प्रदान करती है। आपकी फोटोग्राफी हमारे आसपास घट रही घटनाओं, प्रकृति, पेड़-पौधे, पक्षी, बाग-बगीचे, सड़कें और यहां तक कि पार्किंग में खड़ी कार तक में विषय ढूंढ लेती है जो आपकी व्यापक सोच का उदाहरण भी है।

पुस्तक में 64 नंबर की फोटो में दो कारों के बीच में जिस तरह आपने अनुभव को दर्शाया है उससे आप एक मेंटर की भूमिका भी निभा जाते हो। यहां स्लोगन में तस्वीर देखने वाले को मार्गदर्शन का काम भी आपने किया है। “हमारा शरीर एक कार की तरह है और हम खुद एक ड्राइवर हैं, यदि हमें यात्रा को आसान बनाना है तो कार को मेंटेन रखना होगा”… ऐसे स्लोगन हर तस्वीर को शब्द प्रदान कर रहे हैं… जो एक फोटो पत्रकार की सोच का भी प्रदर्शन है।

इसके लिए आपका आभार और आपके फोटोग्राफी मेंटर महेश स्वामी जी को भी धन्यवाद, जिन्होंने आपको प्रकृति की मौन भाषा को समझाया और कैमरे के जरिये बयां करने के लिए प्रोत्साहित किया।

धन्यवाद
मनीष कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार  31 August 2021

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